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शासन की भावांतर योजना का लाभ किसानों की अपेक्षा व्यापारी उठा रहे हंै-कृषिमंत्री
मैंने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वह अपने-अपने जिले में यह देखें कि किसानों को भावांतर योजना का लाभ मिले और व्यापारियों को समझाएं कि वह किसानों को फसल का उचित मूल्य दें

इटारसी। भावांतर योजना का लाभ किसानों की अपेक्षा व्यापारी उठा रहे है। इस बात को स्वीकार करते हुए कृषिमंत्री गौरीशंकर बिसेन ने यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि वह इस योजना की समीक्षा करेंगे। श्री बिसेन के अनुसार किसानों की लगातार शिकायत आ रही है कि योजना लागू होने के बाद व्यापारियों ने अचानक मूल्य गिरा दिये है जिससे किसानों को नुकसान होने लगा है। श्री बिसेन ने कहा कि यह योजना किसानों के लाभ के लिए व्यापारी का मुनाफा बढ़ाने के लिए नहीं अगर व्यापारी रेट नहीं देगा तो औसत भाव भी कम हो जायेगा और किसानों को और नुकसान होगा।
कृषि विभाग का यह दावा है कि भावांतर में फसल दर गैर रजिस्टर्ड किसानों की उपज से बेहतर भावांतर में फसल की दर रजिस्टे्रशन नहीं कराने वाले किसानों की फसल दर से बेहतर है। मंडी में 3.8 लाख क्विंटल के व्यवसाय से 21.065 आक्सर की विवेचना की गई है जिसमें 1 लाख क्विंटल उपज ऐसी पाई गई जिनके किसानों ने रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया। उड़द में बीबीवायके अंतर्गत 4275 विक्री में से 36475 क्विंटल का औसत और विक्रीदर 2438 रुपए प्रति क्विंटल जबकि रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले किसानों का बिक्रीदर 2205 रुपए क्विंटल आया है। सोयाबीन में 15505 ट्राइजेक्शन में से 314068 क्विंटल की औसत दर पर 2521 रुपए आ रही है। जबकि जिन किसानों ने रजिस्टे्रशन नहीं कराया है उनकी औसत दर 2432 रुपए आई है। मूंग की औसत दर 2158 रुपए जबकि बगैर रजिस्टे्रशन की औसत दर 2771 रुपए आई है।
श्री बिसेन ने कहा कि मैं प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश दे रहा हूं कि वह अपने-अपने जिलों में व्यापारियों को समझाये कि वह किसानो को उचित मूल्य दें। इस संबंध में बड़ी संख्या में किसानों ने रजिस्टे्रशन कराया है और उन्हें नुकसान नही होने दिया जायेगा। किसान मंडी में जिस भी मूल्य पर अपनी फसल बेचते है उस फसल के समर्थन मूल्य व मंडी मूल्य के अंतर की राशि किसानों को भावांतर के अंतर्गत मिलेगी। कृषिमंत्री हरदा जिले का दौरा कर कुछ समय इटारसी रूके थे यहां से वह टे्रन द्वारा ग्वालियर के लिए रवाना हुए।
हरदा में किसान संघ के प्रतिनिधियों ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर कृषिउपज मंडियों में भावांतर योजना लागू होते हुए खाद्यान्न के भाव में गिरावट की ओर ध्यान आकर्षित किया था और उन्हें बताया था कि शासन की भावांतर योजना से किसानों को नहीं अपितु व्यापारियों को लाभ मिल रहा है। जैसे ही भावांतर योजना लागू की गई समर्थन मूल्य से कम मूल्य पर खाद्यान्न बिकने लगा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश के बावजूद किसानों को उनके द्वारा बेचे गए खाद्यान्न का 50 हजार रुपए तक का भुगतान नहीं हो रहा है जिससे किसानों में तीव्र असंतोष व्याप्त है। खिड़किया, हरदा, टिमरनी मंडी में किसानों के आंदोलन की जानकारी भी कृषिमंत्री को दी गई। जिसे कृषिमंत्री ने बहुत ही गंभीरता से लिया और किसान संघ के प्रतिनिधि मंडल को आश्वस्त किया कि वह इस ओर गंभीरता से विचार कर रहे है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले। मैंने प्रदेश की सभी मंडियों के संबंध में जानकारी मांगी है कि 16 अक्टूबर से लागू भावांतर योजना के बाद किस-किस अनाज के भाव 16 अक्टूबर के पहले क्या थे? और 16 अक्टूबर के बाद वर्तमान स्थिति में क्या है। किसान संघ के प्रतिनिधियों को कृषिमंत्री गौरीशंकर बिसेन ने आश्वस्त किया कि किसानों को भावांतर योजना से लाभ दिलाया जायेगा परंतु यह लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने पंजीयन कराया है। सरकार के भावांतर योजना में पंजीयन की तिथि 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। इटारसी पहुंचने पर कृषिउपज मंडी के अध्यक्ष श्री विक्रम सिंह तोमर, ग्रेन मर्चेट एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश सावरिया सहित अनेक व्यापारियों ने उनका स्वागत किया।