डॉ. निर्भय का हौसला और जुनून

 डॉ. निर्भय का हौसला और जुनून युवाओं के लिए स्वास्थ्य जीवन जीने की प्रेरणा

इटारसी। शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहने के लिए प्रतिदिन एक्सरसाइज, वर्कआउट, मेडिटेशन करना बेहद जरूरी होता है। इससे आप लंबी उम्र तक हेल्दी रह सकते हैं। एक्सरसाइज करने से कई रोगों से बचाव होता है। कुछ लोग घर में तो कुछ लोग एक्सरसाइज करना पसंद करते हैं। जिम करने के अपने ही फायदे होते हैं। जिम में वर्कआउट करने के फायदे कुछ अधिक होते हैं। ऐसे ही हमारे बीच द ग्रेंड एवेन्यू में रहने वाले 83 वर्षीय डॉ.निभय है जो प्रतिदिन अपनी दिनचर्या में जिम को महत्व देते है। 


द ग्रेंड एवेन्यू के फेस टू में इन दिनों सुबह सुबह बहुत बढिय़ा-बहुत बढिय़ा, वेलडन सर का शोर सुनाई देता है। गुड वेरी गुड जैसे हौसला अफजाई करने वाले यह शब्द 83 वर्ष के डॉ. निर्भय के लिए वहां उपस्थित लोगों द्वारा कहे जा रहे हैं। डॉ.निर्भय भारत में एथलेटिक्स के कोच रहे हैं और सेना से लेफ्टीनेंट कमांडर की पोस्ट से रिटायर्ड हो चुके हैं। डॉ. निर्भय आज भी अपनी फिटनेस को बरकरार रखने के लिए प्रतिदिन एलकेजी कालोनी के फेस टू में उन्हीं के खाली प्लाट में हैमर थ्रो और डिसकस थ्रो की प्रेक्टिस करते हैं। युवाओं को मात दे रहे डॉ. निर्भय का हौसला और जुनून ही है जो अन्य लोगों को स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा दे रहा है।

द ग्रेंड एवेन्यू के फेस वन में रहने वाले डॉ. निर्भय से उनकी दिनचर्या के बारे में चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन सुबह तीन साढ़े तीन बजे उठते हैं और रात्रि दस बजे सो जाते हैं। सुबह लगभग आठ बजे ग्राउंड पर पहुंच जाते हैं। जहां हैमर और डिसकस की प्रेक्टिस करते हैं। वे बताते हैं कि पांच किलो का हैमर छह-छह के चार सेट बीस मीटर के करीब फेंकते हैं। उनके द्वारा चालीस डिग्री तक के निश्चित कोण पर हैमर को हर बार फेंकते हुए देखना काबिले तरीफ है, जो दूसरे के लिए प्रेरणादायी भी है। वहीं एक किलो की डिसकस के छह-छह सेट लगाते हुए 36 बार लगभग 12 मीटर के करीब फेंक देते हैं।  यहां तकरीबन ढाई तीन घंटे पसीना बहाने के बाद डॉ. निर्भय घर पर बनी अपनी जिम में वर्क आउट करते हैं। जहां एक बार फिर वार्मअप होने के बाद उनके द्वारा वेट ट्रेनिंग पर अभ्यास किया जाता है, जिसमें बेंच प्रेस में 18 किलो वजन से शुरू कर 50 किलो वजन तक के अनेक सेट लगाते हैं। इसके बाद लेग प्रेस, 60 किलो तक की चेस्ट पुलिंग, डेड लिफ्ट, बायसेप्स, ट्राइ सेप्स, सोल्डर इत्यादि व्यायाम करने के बाद स्ट्रेचिंग और लिंबर डाउन करके सुबह की लगभग ढाई घंटे की जिम पूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टर की सलाह पर अब रनिंग करना बंद कर दिया है। प्रतिदिन घर पर ही लगी ट्रेड मिल पर वाकिंग करना और ग्राउंड पर स्टेचिंग और एक्सरसाइज करना अब दिनचर्या में शामिल है।

डॉ. डीएस निर्भय सेंट्रल गवर्नमेंट की एशिया की सबसे बड़ी एलएनआईपीई यूनिवर्सिटी ग्वालियर में सीनियर कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वे बताते हैं कि यहां 22 वर्ष की सेवा में भारत सहित जापान, कोरिया जैसे अनेक देशों से आए नवजवानों को फिजिकल ट्रेनिंग दी है। वहीं स्पोट्र्स साइक्लाजी एवं अंग्रेजी माध्यम से ही एमए साइक्लाजी और सोसोलॉजी की डिग्री के साथ ही मनोवि
ज्ञान से पीएचडी करने वाले डॉ. निर्भय ने इंडिया के कोच रहते हुए अनेक अवार्ड और मैडल अपने नाम किए। इनके द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त जवानों ने राष्ट्रीय एवं अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मैडल हासिल कर चुके हैं। पिछले वर्ष 80 वर्ष की आयु वर्ग में दौड़ प्रतियोगिता में गोल्ड मैडल हासिल कर चुके हैं। वर्ष 1999 में सेवानिवृत्ति के बाद चार साल तक जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर में एथलेटिक्स की ट्रेनिंग दी है। वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट पटियाला में भी अपनी सेवाए दे चुके हैं और ग्वालियर की जिम में भी ट्रेनर की भूमिका अदा कर चुके हैं। बचपन से अब तक स्पोट्र्स को ही अपना जीवन बनाने वाले डॉ. निर्भय अपनी उपलब्धियों का सारा श्रेय ईश्वर और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कुलदीप कौर निर्भय जो कि पूर्व प्रिंसिपल जूनियर सेक्शन केंद्रीय विद्यालय ग्वालियर रह चुकी है और उनकी बेटी को देते हैं।

व्यायाम का समय कार्यशैली के हिसाब से निर्धारित करें- आज की युवा पीढ़ी को डॉ. डीएस निर्भय कहना चाहते हैं कि रात में जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना मनुष्य को स्वस्थ, धनवान और बुद्धिमान बनाता है। आपकी दिनचर्या के बाद भरपूर आराम भी आवश्यक है। आपकी कार्यशैली के हिसाब से शरीर को आराम भी मिलना चाहिए। व्यायाम का समय अपनी कार्यशैली के हिसाब से आप निर्धारित कर सकते हैं। व्यायाम कभी भी कहीं भी किया जा सकता है। छोटी छोटी मुद्राएं आप खड़े-खड़े या चलते हुए भी कर सकते हैं। वे बताते हैं कि अपनी कुर्सी पर बैठे बैठे ही दस बार उठना, दस बार बैठना करें। बैठे या खड़े खड़े ही हाथ, पैरों को मोडऩा, सीधे करना, हथेलियों को एक दूसरे से दबाना, घुमाना इत्यादि कर सकते हैं। खास बात अपना काम स्वयं करें। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन नियत समय पर करें। यदि संभव हो तो कुछ समय के लिए किसी निर्देशक सेे व्यायाम सीख कर अपने जीवन में उतार सकते हैं। उन्होंने कहा कि जहां चाह है वहां राह भी है यदि आप ठान लेंगे तो कोई रोक नहीं सकता। स्वस्थ्य शरीर से ही स्वस्थ सोच, स्वस्थ विचार, स्वस्थ परिवार और स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। 


जिम करने से शरीर को फायदा-डॉ.निर्भय बताते है कि जिम में नियमित रूप से व्यायाम करने से कई शारीरिक स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। यह आपके हृदय प्रणाली को मजबूत करता है, रक्तचाप को कम करता है, लचीलेपन और जोड़ों की गतिशीलता में सुधार करता है, हड्डियों के घनत्व को बढ़ाता है और स्वस्थ वजन प्रबंधन को बढ़ावा देता है।  जिम में कार्डियो मशीनों से लेकर वेटलिफ्टिंग स्टेशनों तक, वर्कआउट को आकर्षक बनाती है, बोरियत को रोकती है, और आपको विभिन्न मांसपेशी समूहों को लक्षित करने में सक्षम बनाती है, जिससे एक संतुलित शरीर को बढ़ावा मिलता है। डॉ.निर्भय बताते है कि उनके स्वस्थ जीवन का यही राज है।