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Poem-New year's hoot-nagarkatha-31-12-2017

                                     नये वर्ष की आहट
नये वर्ष की आहट देख,
बीते वर्ष ने कुछ,
बात कही ,
आके कानों मे मुझसे ,नई सीख नई
सौगात कही ,
नये वर्ष की आहट देख ,
बीते वर्ष ने कुछ बात कही ।
था हसीन वो ,
हर लम्हा यादगार ,
खट्टी मीठी ,
कुछ वो बात कही ,
क्या खोया ,
क्या पाया मैने ,
उस हर लम्हे की,
बात कही ,
कर जोड़ घटाना ,
गुणा भाग ,
इस साल की ,
हिसाब किताब कही ,
नये वर्ष की आहट देख ,
बीते वर्ष ने कुछ बात कही ।
छोड़ कुछ बीती ,
खटास को ,
नये साल नई ,
मिठास कही
अधूरे रहे उन ,
वादों को ,
पूरे करने की ,
बात कही ,
नये वर्ष की आहट देख ,
बीते वर्ष ने कुछ बात कही ।
गुजरे उन हालातों को ,
तू याद न कर ,
जीने की ये ,
फरियाद कही ,
आँखों मे सजे ,
उन सपनों को ,
पूरे करने की ,
बात कही ,
नये वर्ष की आहट देख ,
बीते वर्ष ने कुछ बात कही ।
हो नव वर्ष ,
हर्षित पुलकित ,
प्रफुल्लित होने की ,
बात कही ,
हो सुमन सुगंध ,
जीवन में सर्जन ,
सुशोभित होने की ,
बात कही ,
नये वर्ष की आहट देख ,
बीते वर्ष ने कुछ बात कही ।
- प्रज्ञा जायसवाल,सोहागपुर मोबा-8982390933