मुख्यमंत्री हेल्पलाईन 181 पर नागरिकों द्वारा की गई शिकायतों पर झूठी जानकारी देकर शिकायतों का निराकरण से अवगत कराया जाता है
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विगत 12 वर्षों से लगातार मुख्यमंत्री के पद पर रहने के कारण वह आम नागरिकों से रूबरू होकर उनकी ज्वलंत समस्या से भलीभांति परिचित हैं और वह यह भी जानते हंै कि उनके दौरे के दौरान नागरिकों द्वारा उन्हें दी जाने वाली अधिकांश शिकायतें स्थानीय स्तर की होती है जिसका निराकरण स्थानीय अधिकारियों द्वारा किया जाना चाहिए परंतु स्थानीय स्तर पर अधिकारी और कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं जिसके परिणाम स्वरूप मुख्यमंत्री के प्रत्येक जनसंपर्क दौरे के दौरान शिकायतों का अंबार लग जाता है।
शिकायतों की समीक्षा के दौरान यह बात प्रकाश में आई है कि सर्वाधिक शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित होती हैं इसलिए मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाईन 181 प्रारंभ की है। यहां 181 फ्री टोल नंबर पर नागरिक अपनी शिकायतों से अवगत करा सकते हैं परंतु 181 पर की गई शिकायतों पर संबंधित अधिकारी कार्यवाही की अपेक्षा झूठी जानकारी भेजकर समस्या का निराकरण से सीएम हेल्पलाईन को अवगत कराते हैं। उदाहरण के तौर पर इटारसी के चिकमंगलूर चौराहे से रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले मार्ग के मध्य में अवैध रूप से पक्की दुकानों का निर्माण अस्थाई लीज पर किया जा रहा है जिसकी शिकायत सीएम हेल्पलाईन में करने के बाद नगरपालिका परिषद इटारसी की ओर से उत्तर दिया गया कि व्यवसायी स्वयं निर्माण कर रहे हैं नगरपालिका नहीं। यह कैसा उत्तर है? यह कैसा समस्या का समाधान है? जब इटारसी में मास्टर प्लान लागू है तो मास्टर प्लान के नियमानुसार निर्माणाधीन काम्पलेक्स का नक्शे का अनुमोदन किये बिना कैसे निर्माण किया जा रहा है यह प्रश्र विचारणीय है?
इटारसी प्रदेश के भूकम्प ग्रस्त क्षेत्र में शामिल है इस कारण यहां प्रथम तल के अलावा द्वितीय, तृतीय तल की अनुमति निर्माणकार्य में नहीं दी जा रही है परंतु इन सबकी उपेक्षा कर यहां बनाये गए बड़े-बड़े काम्पलेक्सों में पार्किंग तक की व्यवस्था नहीं की गई है। अब मास्टर प्लान को लागू करने की जबावदारी किसकी है? वर्षों की मेहनत के बाद मास्टर प्लान 2001 में लागू किया गया। 2016 में रिवाइज मास्टर प्लान लागू किया गया। अब रिवाइज मास्टर प्लान की उपेक्षा कर जब नगरपालिका परिषद द्वारा सब्जीमंडी, बाजार क्षेत्र में दुकानों का निर्माण बिना किसी भविष्य की योजना को ध्यान में रखते हुए किया जायेगा तो नगर की बढ़ती आबादी के दौरान यातायात कैसे संचालित होगा? यह प्रश्र विचारणीय है? अस्थाई लीज पर स्थाई निर्माण नियम के विपरीत है परंतु अस्थाई लीज पर पक्का निर्माण कैसे और किसकी अनुमति से किया जा रहा है? इस प्रश्र का उत्तर नगरपालिका परिषद इटारसी की ओर से नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण पुन: शहर अतिक्रमण की चपेट में आ रहा हैं।
वर्षाऋतु में पानी का निकास कैसे होगा? इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया है। यहां एक ओर स्वच्छ भारत अभियान चलाकर नगर को साफ सुथरा करने की पहल की जा रही है। केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी और अमृत योजना में इटारसी शामिल क्यों नहीं हुआ इस विषय पर शायद किसी ने गंभीरता से विचार नहीं किया। अब मिनी स्मार्ट सिटी में इटारसी को शामिल किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश की नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह के अनुसार प्रदेश के 32 नगरों को मिनी स्मार्ट सिटी में शामिल किया जायेगा और उन्हें विकास के लिए 30-30 करोड़ की राशि दी जायेगी। अब इटारसी को मिनी स्मार्ट सिटी में अपना स्थान पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है परंतु यह कोई नहीं सोच रहा है कि जब मास्टर प्लान के अंतर्गत नगर का विकास नहीं होगा तो कैसे शहर मिनी स्मार्ट सिटी में शामिल होगा। व्यवस्थित ड्रेनेज नहीं होने से चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य है, किसी भी ईमारत के निर्माण के दौरान डे्रनेज की व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि वर्षा ऋतु का पानी सड़कों पर एकत्रित होकर आवागमन में अवरूद्ध नहीं बने। शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशन रोड पर जरा सी वर्षा होने पर पानी भर जाता है जिससे सर्वाधिक फुटपाथ पर चलने वाले राहगीरों को परेशानी होती है क्योंकि यहां फुटपाथ की व्यवस्था ही नहीं है। फुटपाथ पर गुमठियां बनाई गई है जबकि टाउन कंट्री प्लानिंग विभाग के अनुसार ओवरब्रिज से रेलवे स्टेशन तक आने वाले मार्ग को 80 फुट चौड़ा प्रस्तावित किया गया है परंतु इस ओर आज किसी का ध्यान नहीं है। जगह-जगह गुमठी लगाकर इस मार्ग को पुन: अतिक्रमण की चपेट में लाया जा रहा है। जबकि इस मार्ग पर सर्वाधिक भारी वाहनों का आवागमन हो रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इटारसी के विकास के लिए चिंतित नजर आ रहे हैं। समय-समय पर उन्होंने इटारसी के विकास पर चिंता की है परंतु स्थानीय स्तर पर जिन अधिकारियों के जिम्मे विकास का दायित्व है वह अपने कत्र्तव्यों का निर्वाह नहीं कर रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरूप आज नगर अतिक्रमण की चपेट में बुरी तरह आ चुका है। भारी वाहनों के कारण आवागमन अवरूद्ध हो रहा हैं जिससे सदैव दुर्घटनाओं का भय बना रहता है। नागरिक मुख्यमंत्री हेल्पलाईन में शिकायत करते है परंतु शिकायतों की गलत जानकारी देकर मुख्यमंत्री हेल्पलाईन को गुमराह किया जाता है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विगत 12 वर्षों से लगातार मुख्यमंत्री के पद पर रहने के कारण वह आम नागरिकों से रूबरू होकर उनकी ज्वलंत समस्या से भलीभांति परिचित हैं और वह यह भी जानते हंै कि उनके दौरे के दौरान नागरिकों द्वारा उन्हें दी जाने वाली अधिकांश शिकायतें स्थानीय स्तर की होती है जिसका निराकरण स्थानीय अधिकारियों द्वारा किया जाना चाहिए परंतु स्थानीय स्तर पर अधिकारी और कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं जिसके परिणाम स्वरूप मुख्यमंत्री के प्रत्येक जनसंपर्क दौरे के दौरान शिकायतों का अंबार लग जाता है।
शिकायतों की समीक्षा के दौरान यह बात प्रकाश में आई है कि सर्वाधिक शिकायतें राजस्व विभाग से संबंधित होती हैं इसलिए मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाईन 181 प्रारंभ की है। यहां 181 फ्री टोल नंबर पर नागरिक अपनी शिकायतों से अवगत करा सकते हैं परंतु 181 पर की गई शिकायतों पर संबंधित अधिकारी कार्यवाही की अपेक्षा झूठी जानकारी भेजकर समस्या का निराकरण से सीएम हेल्पलाईन को अवगत कराते हैं। उदाहरण के तौर पर इटारसी के चिकमंगलूर चौराहे से रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले मार्ग के मध्य में अवैध रूप से पक्की दुकानों का निर्माण अस्थाई लीज पर किया जा रहा है जिसकी शिकायत सीएम हेल्पलाईन में करने के बाद नगरपालिका परिषद इटारसी की ओर से उत्तर दिया गया कि व्यवसायी स्वयं निर्माण कर रहे हैं नगरपालिका नहीं। यह कैसा उत्तर है? यह कैसा समस्या का समाधान है? जब इटारसी में मास्टर प्लान लागू है तो मास्टर प्लान के नियमानुसार निर्माणाधीन काम्पलेक्स का नक्शे का अनुमोदन किये बिना कैसे निर्माण किया जा रहा है यह प्रश्र विचारणीय है?
इटारसी प्रदेश के भूकम्प ग्रस्त क्षेत्र में शामिल है इस कारण यहां प्रथम तल के अलावा द्वितीय, तृतीय तल की अनुमति निर्माणकार्य में नहीं दी जा रही है परंतु इन सबकी उपेक्षा कर यहां बनाये गए बड़े-बड़े काम्पलेक्सों में पार्किंग तक की व्यवस्था नहीं की गई है। अब मास्टर प्लान को लागू करने की जबावदारी किसकी है? वर्षों की मेहनत के बाद मास्टर प्लान 2001 में लागू किया गया। 2016 में रिवाइज मास्टर प्लान लागू किया गया। अब रिवाइज मास्टर प्लान की उपेक्षा कर जब नगरपालिका परिषद द्वारा सब्जीमंडी, बाजार क्षेत्र में दुकानों का निर्माण बिना किसी भविष्य की योजना को ध्यान में रखते हुए किया जायेगा तो नगर की बढ़ती आबादी के दौरान यातायात कैसे संचालित होगा? यह प्रश्र विचारणीय है? अस्थाई लीज पर स्थाई निर्माण नियम के विपरीत है परंतु अस्थाई लीज पर पक्का निर्माण कैसे और किसकी अनुमति से किया जा रहा है? इस प्रश्र का उत्तर नगरपालिका परिषद इटारसी की ओर से नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण पुन: शहर अतिक्रमण की चपेट में आ रहा हैं।
वर्षाऋतु में पानी का निकास कैसे होगा? इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया है। यहां एक ओर स्वच्छ भारत अभियान चलाकर नगर को साफ सुथरा करने की पहल की जा रही है। केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी और अमृत योजना में इटारसी शामिल क्यों नहीं हुआ इस विषय पर शायद किसी ने गंभीरता से विचार नहीं किया। अब मिनी स्मार्ट सिटी में इटारसी को शामिल किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश की नगरीय प्रशासन मंत्री माया सिंह के अनुसार प्रदेश के 32 नगरों को मिनी स्मार्ट सिटी में शामिल किया जायेगा और उन्हें विकास के लिए 30-30 करोड़ की राशि दी जायेगी। अब इटारसी को मिनी स्मार्ट सिटी में अपना स्थान पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है परंतु यह कोई नहीं सोच रहा है कि जब मास्टर प्लान के अंतर्गत नगर का विकास नहीं होगा तो कैसे शहर मिनी स्मार्ट सिटी में शामिल होगा। व्यवस्थित ड्रेनेज नहीं होने से चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य है, किसी भी ईमारत के निर्माण के दौरान डे्रनेज की व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि वर्षा ऋतु का पानी सड़कों पर एकत्रित होकर आवागमन में अवरूद्ध नहीं बने। शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशन रोड पर जरा सी वर्षा होने पर पानी भर जाता है जिससे सर्वाधिक फुटपाथ पर चलने वाले राहगीरों को परेशानी होती है क्योंकि यहां फुटपाथ की व्यवस्था ही नहीं है। फुटपाथ पर गुमठियां बनाई गई है जबकि टाउन कंट्री प्लानिंग विभाग के अनुसार ओवरब्रिज से रेलवे स्टेशन तक आने वाले मार्ग को 80 फुट चौड़ा प्रस्तावित किया गया है परंतु इस ओर आज किसी का ध्यान नहीं है। जगह-जगह गुमठी लगाकर इस मार्ग को पुन: अतिक्रमण की चपेट में लाया जा रहा है। जबकि इस मार्ग पर सर्वाधिक भारी वाहनों का आवागमन हो रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इटारसी के विकास के लिए चिंतित नजर आ रहे हैं। समय-समय पर उन्होंने इटारसी के विकास पर चिंता की है परंतु स्थानीय स्तर पर जिन अधिकारियों के जिम्मे विकास का दायित्व है वह अपने कत्र्तव्यों का निर्वाह नहीं कर रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरूप आज नगर अतिक्रमण की चपेट में बुरी तरह आ चुका है। भारी वाहनों के कारण आवागमन अवरूद्ध हो रहा हैं जिससे सदैव दुर्घटनाओं का भय बना रहता है। नागरिक मुख्यमंत्री हेल्पलाईन में शिकायत करते है परंतु शिकायतों की गलत जानकारी देकर मुख्यमंत्री हेल्पलाईन को गुमराह किया जाता है।







