Despite the announcement of the Chief Minister, liquor shops, which were opened in schools etc.,were not closed.
मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद स्कूल आदि क्षेत्र में खोली गई शराब की दुकानें बंद नहीं हुई
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगामी एक अप्रैल से शराब की दुकानों में खोले गए बार आहतों को बंद करने का सराहनीय निर्णय लिया है। आबकारी अधिकारियों और शराब माफिया की सांठ-गांठ के कारण यह निर्णय लिया गया था जिसके दुष्परिणाम सामने आने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की सभी शराब की दुकानों में खोले गए बार आहतों को बंद करने का निर्णय लिया है मुख्यमंत्री ने गल्र्स होस्टल, धार्मिक स्थलों और स्कूलों के आसपास की शराब की दुकानों की सूची बनाकर तत्काल शराब की दुकान और आहते बंद कराने के निर्देश दिये है। परंतु मुख्यमंत्री के निर्देश का क्रियान्वयन का नही होना आश्चर्य की बात है। आखिर क्या कारण है कि इस निर्णय को लागू करने में अधिकारी हीलहवाला कर रहे है। जनहित में इस निर्णय को अविलंब लागू कर मुख्यमंत्री की घोषणा को अविलंब लागू किया जाना चाहिए था। परंतु आबकारी अधिकारियों के निष्क्रियता से अभी मुख्यमंत्री के आदेश का पालन यहां होते नजर नहीं आ रहा है।
जिस प्रकार सुप्रीमकोर्ट ने नेशनल हाईवे और राज्यमार्ग के नजदीक खोली गई शराब की दुकानों को बंद कराया है उसी प्रकार आबकारी विभाग द्वारा शराब माफिया के हित में गली मोहल्लों में खोली गई देशी-विदेशी शराब की दुकानें अविलंब बंद कराई जाना चाहिए जिससे प्रदेश में घट रहे अपराधों में कमी आयेगी। आज प्रदेश में अपराधों में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। छोटी-छोटी बच्चियां तक दुष्कर्म का शिकार हो रही है इन सबके पीछे यदि खोजा जाये तो शराब ही मुख्य कारण बताया जाता है। गली मोहल्लों में चौक चौराहे पर खड़े अपराधिक तत्व शराब पीने के बाद उत्पात मचाते है, राह चलते लोगों से रुपये मांगते है। नहीं देने पर गाली गलौच कर मारपीट करते हैं। इस कारण आवासीय क्षेत्रों में खोली गई शराब की दुकानें बंद करने का साहसिक निर्णय लेकर मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता को नए साल की सौगात दें। शराब माफिया की पकड़ आज इतनी मजबूत है कि वह आबकारी विभाग में अपने हित में नियम बनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ता है। परंतु जनहित के विरुद्ध बनाये गए नियमों के दुष्परिणाम क्या होते है? यह कोई नहीं देखता है। आज देश में प्रदेश की सर्वाधिक बदनामी दुष्कर्म के कारण हो रही है। दुष्कर्म के पीछे का कारण मुख्यरूप से शराब है। शराब पीने के बाद लूटमार, अवैध वसूली, दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध हो रहे है, यदि वास्तव में अपराधों पर नियंत्रण पाना है तो आवासीय क्षेत्रों में खोली गई दुकानों को बंद करने का निर्णय लेना चाहिए इससे सरकार की रेव्यूनू में कितनी कमी आयेगी इस बात की चिंता मुख्यमंत्री जी को नहीं करना चाहिए।
पिछले दिनों पिपरिया तहसील के अंतर्गत बालिकाओं ने कलेक्टर से बताया कि उनके गांव में स्कूल नहीं होने पर वह तरोंदकला आती है यहां उनके साथ शराबियों द्वारा छेड़छाड़ कर भद्दे-भद्दे फब्तियां कसी जाती है इस कारण अनेक छात्राओं ने आज पढऩा छोड़ दिया है। उन्होंने कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी से भेंट कर तरोंदकला में शराब की दुकान को बंद कराये जाने की मांग की। आज आबकारी विभाग से सांठगांठ कर शराब माफिया ने जगह-जगह कमीशन पर शराब बिकवाई जा रही है। ऐसा कोई गांव नहीं है जहां शराब की अवैध विक्री नहीं हो रही है। इसके विरुद्ध एक सघन अभियान चलाये जाने की आज नितांत आवश्यकता है। चूंकि शराब माफिया स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की जेब गरम करता है अत: स्थानीय स्तर पर कोई अधिकारी इनके विरुद्ध कार्यवाही की पहल नहीं करता है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगामी एक अप्रैल से शराब की दुकानों में खोले गए बार आहतों को बंद करने का सराहनीय निर्णय लिया है। आबकारी अधिकारियों और शराब माफिया की सांठ-गांठ के कारण यह निर्णय लिया गया था जिसके दुष्परिणाम सामने आने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की सभी शराब की दुकानों में खोले गए बार आहतों को बंद करने का निर्णय लिया है मुख्यमंत्री ने गल्र्स होस्टल, धार्मिक स्थलों और स्कूलों के आसपास की शराब की दुकानों की सूची बनाकर तत्काल शराब की दुकान और आहते बंद कराने के निर्देश दिये है। परंतु मुख्यमंत्री के निर्देश का क्रियान्वयन का नही होना आश्चर्य की बात है। आखिर क्या कारण है कि इस निर्णय को लागू करने में अधिकारी हीलहवाला कर रहे है। जनहित में इस निर्णय को अविलंब लागू कर मुख्यमंत्री की घोषणा को अविलंब लागू किया जाना चाहिए था। परंतु आबकारी अधिकारियों के निष्क्रियता से अभी मुख्यमंत्री के आदेश का पालन यहां होते नजर नहीं आ रहा है।
जिस प्रकार सुप्रीमकोर्ट ने नेशनल हाईवे और राज्यमार्ग के नजदीक खोली गई शराब की दुकानों को बंद कराया है उसी प्रकार आबकारी विभाग द्वारा शराब माफिया के हित में गली मोहल्लों में खोली गई देशी-विदेशी शराब की दुकानें अविलंब बंद कराई जाना चाहिए जिससे प्रदेश में घट रहे अपराधों में कमी आयेगी। आज प्रदेश में अपराधों में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। छोटी-छोटी बच्चियां तक दुष्कर्म का शिकार हो रही है इन सबके पीछे यदि खोजा जाये तो शराब ही मुख्य कारण बताया जाता है। गली मोहल्लों में चौक चौराहे पर खड़े अपराधिक तत्व शराब पीने के बाद उत्पात मचाते है, राह चलते लोगों से रुपये मांगते है। नहीं देने पर गाली गलौच कर मारपीट करते हैं। इस कारण आवासीय क्षेत्रों में खोली गई शराब की दुकानें बंद करने का साहसिक निर्णय लेकर मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता को नए साल की सौगात दें। शराब माफिया की पकड़ आज इतनी मजबूत है कि वह आबकारी विभाग में अपने हित में नियम बनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ता है। परंतु जनहित के विरुद्ध बनाये गए नियमों के दुष्परिणाम क्या होते है? यह कोई नहीं देखता है। आज देश में प्रदेश की सर्वाधिक बदनामी दुष्कर्म के कारण हो रही है। दुष्कर्म के पीछे का कारण मुख्यरूप से शराब है। शराब पीने के बाद लूटमार, अवैध वसूली, दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध हो रहे है, यदि वास्तव में अपराधों पर नियंत्रण पाना है तो आवासीय क्षेत्रों में खोली गई दुकानों को बंद करने का निर्णय लेना चाहिए इससे सरकार की रेव्यूनू में कितनी कमी आयेगी इस बात की चिंता मुख्यमंत्री जी को नहीं करना चाहिए।
पिछले दिनों पिपरिया तहसील के अंतर्गत बालिकाओं ने कलेक्टर से बताया कि उनके गांव में स्कूल नहीं होने पर वह तरोंदकला आती है यहां उनके साथ शराबियों द्वारा छेड़छाड़ कर भद्दे-भद्दे फब्तियां कसी जाती है इस कारण अनेक छात्राओं ने आज पढऩा छोड़ दिया है। उन्होंने कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी से भेंट कर तरोंदकला में शराब की दुकान को बंद कराये जाने की मांग की। आज आबकारी विभाग से सांठगांठ कर शराब माफिया ने जगह-जगह कमीशन पर शराब बिकवाई जा रही है। ऐसा कोई गांव नहीं है जहां शराब की अवैध विक्री नहीं हो रही है। इसके विरुद्ध एक सघन अभियान चलाये जाने की आज नितांत आवश्यकता है। चूंकि शराब माफिया स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की जेब गरम करता है अत: स्थानीय स्तर पर कोई अधिकारी इनके विरुद्ध कार्यवाही की पहल नहीं करता है।
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