nagarkatha-editorial-17-12-2017

 इटारसी का टेढ़ा मार्ग                                                                            इटारसी की टेढ़ी राजनीति

 और टेढ़े प्रशासन का स्मारक 

          हमारे देश में यह परम्परा रही है कि कई बड़े प्रशासक और राजा अपने जीते जी ही अपनी स्मृति के स्मारक बनवा जाते हैं। उन्हें भविष्य पर भरोसा नहीं होता कि कोई उन्हें याद करेगा अथवा नहीं। इसलिए वह अपने शासन की मृत्यु के पूर्व ही उसकी निशानियां छोड़ जाते हैं। इसी तरह इटारसी में भी एक टेढ़े और सकड़े मार्ग का निर्माण इटारसी के बड़े राजनेताओं और प्रशासन के लोगों के आर्शीवाद से किया जा रहा है। जयस्तंभ के नजदीक चिकमंगलूर चौराहे से स्टेशन के मुख्य गेट तक जाने वाला मार्ग एकदम टेढ़ा और सकड़ा बना दिया जा रहा है इससे कई प्रश्न खड़े होते हैं और भविष्य में भी खड़े होते रहेंगे? 
इटारसी के राजनेताओं,प्रशासकों और अतिक्रमण करने वालों के नाम इटारसी के इतिहास में यह टेढ़ा मार्ग अमर कर जायेगा। आने वाले पीढिय़ों को याद रहेगा कि तुगलक केवल दिल्ली में ही नहीं रहता था बल्कि कई तुगलक इटारसी में भी हैं जिन्होंने यह टेढ़ा मार्ग बनाया। इस टेढ़े मार्ग का नामकरण आम जनता ने पहले ही कर दिया है। इटारसी मुख्य बाजार में प्रवेश करने का पहला मार्ग इटारसी के पुल के समाप्त होते ही आता है, दूसरा मार्ग गुरूद्वारे के पास से होकर जयस्तंभ तक जाता है और तीसरा मार्ग जो रेलवे के मुख्य द्वार से इटारसी नगर को जोड़ता है यही वह टेढ़ा मार्ग है जो इटारसी के राजनेताओं, वर्तमान प्रशासकों और अतिक्रमणकारियों को सदा के लिए अमर कर देने वाला है। 
इटारसी स्टेशन पर 3०० से अधिक टे्रनें आती है और इनसे उतरने वाले हजारों यात्री इस टेढ़े मार्ग के सामने वाले गेट से ही इटारसी नगर में प्रवेश करते हैं। प्रवेश करते ही इटारसी का यह टेढ़ा स्मारक उनका स्वागत करता है और एक झलक दे देता है कि इटारसी के उत्तरदायित्व पूर्णपदों पर बैठे हुए लोगों के काल में इस शहर का प्रशासन कितना टेढ़ा था। यह प्रशासन टेढ़ा ही नहीं बल्कि इतना भय उत्पन्न करने वाला भी था कि कोई भी इसके विरुद्ध आवाज तक नहीं उठा पाया। इस संबंध में जिसने शासन-प्रशासन को जगाने की कोशिश की गई उसकी बातों को अनदेखा कर दिया गया। शायद यहां के राजनेता और प्रशासक इतने भाग्यशाली हैं कि वह अपना नाम इटारसी में इस टेढ़े मार्ग से अमर कर जाना चाहते हैं। 
इटारसी के मास्टर प्लान का प्रारूप भी प्रकाशित हो गया है। नगर एवं ग्राम निवेश म.प्र.भोपाल के आयुक्त द्वारा जारी इटारसी की विकास योजना में कहा गया है कि यह नगर नई दिल्ली-चैन्नई एवं मुम्बई, कोलकाता के मुख्य रेलमार्ग का प्रमुख जंक्शन है। देश के प्रमुख नगरों नई दिल्ली, चैन्नई, कोलकाता, मुंबई, भोपाल, नागपुर आदि से रेल एवं सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। इस प्रस्तावित नगर योजनाओं से नगर की प्रतिष्ठा एवं गरिमा में वृद्धि होगी तथा इटारसीवासियों के लिए अपनी परम्परा एवं गौरव को संजोकर रखना संभव होगा। इस मास्टर प्लान के अनुसार इटारसी का कोई भी स्थानीय मार्ग 9 मीटर से कम चौड़ा नहीं होगा। इसी तरह उपखंड स्तरीय मार्ग 12 मीटर, खंडस्तरीय मार्ग 18 मीटर और मुख्य मार्ग क्रमांक 1 से 6 जो नगरयातायात से जुड़ा है 24 मीटर चौड़ा होगा परंतु इस मास्टर प्लान के घोषित होने के बाद ही इटारसी नगर के मध्य स्थित मार्ग को इसलिए टेढ़ा बनाया जा रहा है क्योंकि इटारसी के किसी व्हीआईपी ने अपने भवन की चौड़ाई बढ़ाकर इस मार्ग के ऊपर चढ़ा दी है। इस अतिक्रमण पर बनाया गया भवन कानून और व्यवस्था को मुंह चिढ़ाता हुआ खड़ा है। इटारसी में आए दिनों अतिक्रमण के नाम पर छोटे-छोटे दुकानदारों, सड़क किनारे खड़े हाथठेले वालों और टोकनियों तक में फल और सब्जी बेचने वालों को सड़क से हटाकर बाहर कर दिया जाता है। आम लोगों से उनकी रोजीरोटी छीनने वाले शासन और प्रशासन में इतना साहस नहीं है कि इटारसी नगर के सबसे मुख्य मार्ग को कम से कम सीधा बना सके। अगर वह ऐसा नहीं कर रहे है तो वास्तव में इटारसी के भविष्य में वह न केवल इटारसी के तुगलक वरन् टेढ़ी राजनीति और टेढ़े शासन-प्रशासन के रूप में याद किये जाते रहेंगे। 
हमारे देश में कई शहरों में ठंडी सड़कें होती है लेकिन ऐसी टेढ़ी सड़क भारत के शायद ही किसी शहर में होगी। कम से कम इटारसी सीधे नहीं तो इस तरीके के टेढ़े कामों से इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने की ओर आगे बढ़ रहा है।