taunakantree plaaning vibhaag ne naksha anumodan karaaye bina nirmaan karane par esadeeo ko kaaryavaahee ke nirdesh diye

टाउनकंट्री प्लानिंग विभाग ने नक्शा अनुमोदन कराये बिना
 निर्माण करने पर एसडीओ को कार्यवाही के निर्देश दिये
अस्थाई पट्टाधारियों द्वारा बिना किसी पूर्व स्वीकृति के
सड़क पर व्यवसायिक काम्पलेक्स का निर्माण किया गया
इटारसी। टाउन कंट्री प्लानिंग विभाग होशंगाबाद के उपसंचालक ने एसडीओ इटारसी को एक पत्र लिखकर उनका ध्यान इटारसी की नजूल सीट क्रमांक 14, प्लाट नंबर 74/1, 74/6 आदि पर अवैध निर्माण की ओर आकर्षित करते हुए अवगत कराया है कि नि
र्माणाधीन दुकानों के संबंध में विभाग ने विकास अनुज्ञा नहीं दी है। इस संबंध में विभाग को प्राप्त शिकायत को आपकी ओर भेजा जा रहा है जिसमें कार्यवाही करें। पत्र की प्रति मुख्य नगरपालिका अधिकारी इटारसी को भी भेजकर उनका ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिये गए है।
चिकमंगलूर चौराह से रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले मार्ग पर नजूल सीट नंबर 14 प्लाट नंबर 74/1, प्लाट नंबर 74/6 पर लगभग एक दर्जन अस्थाई पट्टाधारी व्यवसायियों द्वारा काम्पलेक्स का निर्माण किया जा रहा है। इस संबंध में नगरपालिका, नजूल, टाउनकंट्री प्लानिंग विभाग की ओर से किसी प्रकार की स्वीकृति नहीं दी गई है। मास्टर प्लान के प्रारूप की घोषणा के अनुसार इटारसी नगर में कम से कम 9 मीटर चौड़ा छोटे से छोटा मार्ग रहेगा। यहां स्टेशन की ओर जाने वाले मार्ग की चौड़ाई अब मात्र 12 फिट शेष बची है। शेष अतिक्रमण की चपेट में आ गया है।
जब टाउनकंट्री प्लानिंग विभाग का ध्यान इस ओर आकर्षित कर उन्हें इस निर्माण के संबंध में बताया गया तो विभाग ने स्पष्ट कर दिया कि विभाग ने इस संबंध में किसी प्रकार की स्वीकृति नहीं दी है। अब एसडीओ इटारसी को विभाग की ओर से निर्देशित किया गया है। शिकायत में लिखा था कि यदि नगरपालिका की अनुमति नहीं है तो निर्माणकर्ता एजेंसी कौन है? नजूल विभाग की स्वीकृति है अथवा नहीं? आरबीसी के नियमो ंका उल्लंघन किया जा रहा है? मास्टर प्लान की घोषणा के बाद उसका पालन नहीं किया जा रहा है। कार्यालय उपसंचालक नगर तथा ग्राम निवेश विभाग होशंगाबाद के उपसंचालक ने स्वयं की ओर से इस प्रकरण में स्थिति स्पष्ट कर दी है। मुख्यमंत्री हेल्पलाईन को नगरपालिका की ओर से यह जानकारी दी गई कि नगरपालिका की ओर से कोई निर्माण नहीं किया जा रहा है, संबंधित व्यवसायी स्वयं निर्माण करा रहे है। बहुत अजीब बात है कि अस्थाई लीज पर पक्का निर्माण नियम के अनुसार नहीं किया जा सकता है। इसके पूर्व बस स्टैंड के व्यवसायियों द्वारा टीन से बनाए गए मार्केट की ऊंचाई अधिक किये जाने पर तत्कालीन एसडीओ, नजूल अधिकारी धनराजू एस उसे तोडऩे के लिए पुलिस दल बल के साथ मौके पर पहुंच गए थे तब संबंधित व्यवसायियों ने समय मांगा और दुकानों की ऊंचाई कम की। यह तो रही नजूल की भूमि पर अस्थाई निर्माण की बात। यहां तो पक्का निर्माण किया जा रहा है। जिससे इस शहर की डेढ़ लाख जनता को आवागमन में भारी असुविधा होने वाली है। इस ओर आखिर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है यह आश्चर्य की बात है। दो चार बड़े व्यवसायियों को लाभ पहुंचाये जाने के उद्देश्य से नगर की डेढ़ लाख जनता की बलि यहां दी जा रही है। यहां बाजार कीमत के अनुसार 50 हजार रुपए प्रति वर्गफिट जमीन की कीमत उपपंजीयक कार्यालय के अनुसार है। यदि नगरपालिका स्वयं दुकानों का निर्माण करती और उसे बेचती तो एक-एक दुकान 50-50 लाख में बेचने से नगरपालिका को आय होती और मार्ग को अतिक्रमण से भी बचाया जा सकता था। परंतु न जाने क्यों नगरपालिका के अधिकारी नगरपालिका को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए स्वयं निर्माण न करके अस्थाई पट्टे धारियों द्वारा किये जा रहे निर्माणकार्य को रोकने का प्रयास तक नहीं कर रहे हैं। इसके पीछे उनकी क्या मजबूरी है यह वहीं जानते हैं परंतु 34 सदस्यीय नगरपालिका परिषद के पार्षदों में से मात्र एक-दो पार्षदों ने ही इस निर्माणकार्य पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इस निर्माणकार्य पर आपत्ति जताई है। आखिर क्या है एवं पार्षदों की क्या मजबूरी है कि वह बीच सड़क पर किये जा रहे निर्माणकार्य पर अपनी प्रतिक्रिया देने से भी बच रहे हैं।
स्मरण रहे कि पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष श्री सरताज सिंह के कार्यकाल में इसी क्षेत्र में नजूल विभाग द्वारा आवंटित जमीन पर जब व्यवसायियों द्वारा बेस डालकर निर्माण कराया गया था तो उन्होंने स्वयं खड़े होकर यहां निर्माण तुड़वाया था कि अस्थाई लीज पर पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता है। इसी प्रकार गुरूद्वारे के सामने भारद्वाज जनरल स्टोर में यहां दो बार आग लगने से नुकसान हुआ था। सिंगल ईट सेे किये गए निर्माण को एसडीओ अजय शर्मा और तहसीलदार राजेंद्र राय द्वारा तुड़वाया गया था कि यह अस्थाई लीज का उल्लंघन है।